उत्तराखंड

सैनिक कल्याण में उत्तराखंड बना देश के लिए मॉडल, अग्निवीर रोजगार सेल गठित करने वाला पहला राज्य

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शहीद परिवारों, पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं के हित में धामी सरकार के कई बड़े फैसले; सैन्य धाम का निर्माण पूरा

देहरादून। सैनिक कल्याण के क्षेत्र में उत्तराखंड देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं, अग्निवीरों और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

प्रदेश सरकार ने सेना में चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद घर लौटने वाले अग्निवीरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए अलग रोजगार सेल गठित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला भी पहले ही लिया जा चुका है। सरकार का दावा है कि रोजगार सेल अग्निवीरों को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

शहीदों की प्रतिमाएं पैतृक गांवों में होंगी स्थापित

शहीद सैनिकों के सम्मान में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब भारत माता की रक्षा में बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी। इसका उद्देश्य शहीदों की वीरता और बलिदान की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।

परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को बढ़ी अनुग्रह राशि

सरकार ने वीरता और बलिदान से जुड़े परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी बढ़ोतरी की है। परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹1.50 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ कर दी गई है। वहीं अन्य बलिदानियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख की गई है। विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिकों को मिलने वाली एकमुश्त एवं वार्षिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गई है।

जल्द जनता को समर्पित होगा सैन्य धाम

देहरादून में निर्मित सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अब इसे जल्द जनता को समर्पित करने की तैयारी है। राज्य के शहीद सैनिकों की स्मृति में निर्मित इस सैन्य धाम में उनके घर-आंगन की मिट्टी को सम्मानपूर्वक लाया गया है। यहां बलिदानी सैनिकों की शौर्य गाथाओं को भी स्थान दिया गया है।

28 शहीद आश्रितों को मिली सरकारी नौकरी

धामी सरकार की नीति के तहत प्रत्येक बलिदानी परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था की गई है। अब तक 28 पात्र आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है। सरकार ने आवेदन की समय सीमा को भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया है, जिससे पात्र परिवारों को इसका लाभ लेने के लिए अधिक समय मिल सके।

सैनिकों को स्टाम्प शुल्क में राहत

सेवारत एवं पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीद पर भी राहत दी जा रही है। ₹25 लाख तक की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम सैनिक परिवारों को आर्थिक राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

भूमि धोखाधड़ी मामलों के निस्तारण पर भी जोर

सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों से जुड़े भूमि धोखाधड़ी के मामलों के निस्तारण के लिए भी सरकार ने पहल की है। जिला अदालतों में लंबित मामलों में पीड़ित सैनिक परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संबंधित स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

सैनिक सम्मान और कल्याण सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि शहीदों के आश्रितों और परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों की अनुग्रह राशि में वृद्धि सहित सैनिक कल्याण के क्षेत्र में लिए गए फैसले राज्य की सैन्य परंपरा और वीर सैनिकों के प्रति सम्मान को दर्शाते हैं। सैन्य धाम उत्तराखंड की समृद्ध सैन्य विरासत, शौर्य और बलिदान का प्रतीक बनेगा।

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