बदरीनाथ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक नहीं, शंख को लेकर मंत्री के बयान पर महापंचायत नाराज

सतपाल महाराज ने कहा- धाम में संगीत और सांस्कृतिक आयोजन परंपरा का हिस्सा, चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने जताई आपत्ति
देहरादून। बदरीनाथ धाम में हाल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर उठे विवाद के बीच पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने स्पष्ट किया है कि धाम में संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही प्रतिबंध संबंधी चर्चाओं को तथ्यहीन बताया। वहीं, मंदिर के भीतर शंख बजाने को लेकर मंत्री की टिप्पणी पर चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आपत्ति जताई है।
मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर भारतीय सेना का बैंड धार्मिक धुनें और मंगल संगीत प्रस्तुत करता है। उन्होंने बदरीनाथ को उर्वशी पीठ से जोड़ते हुए कहा कि यहां संगीत के माध्यम से ईश्वर की आराधना और स्तुति की परंपरा रही है। उन्होंने सीमांत गांव माणा में होने वाले पारंपरिक विवाह समारोहों का भी उदाहरण दिया, जहां संगीत और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं।
महाराज के मुताबिक, पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी बदरीनाथ धाम में विभिन्न अवसरों पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। ऐसे में धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर पूरी तरह रोक होने की बात सही नहीं है। उन्होंने श्रद्धालुओं और प्रदेशवासियों से सोशल मीडिया पर प्रसारित अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।
शंख को लेकर मंत्री के बयान से विवाद
मंत्री ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर के अंदर शंख बजाने की परंपरा नहीं है, जबकि मंदिर परिसर के बाहर शंख बजाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। उन्होंने मंदिर की पूजा पद्धति से जुड़ी मान्यता का हवाला देते हुए शंख के संबंध में टिप्पणी की।
मंत्री के इस बयान पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि शंख घरों के अलावा मंदिरों और तीर्थस्थलों में भी पूजा-अर्चना का हिस्सा है। उन्होंने धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यों और मान्यताओं का ध्यान रखने की बात कही।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के स्वरूप पर पहले से उठ रहे थे सवाल
बदरीनाथ में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 के दौरान संगीत और नृत्य कार्यक्रमों के वीडियो सामने आने के बाद कार्यक्रम के स्वरूप और धाम की धार्मिक मर्यादा को लेकर सवाल उठे थे। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और धार्मिक पक्ष से जुड़े लोगों ने आयोजन की प्रस्तुति पर आपत्ति जताई थी।
मामले में अब विवाद का एक प्रमुख केंद्र सांस्कृतिक आयोजनों के स्वरूप के साथ-साथ बदरीनाथ मंदिर की धार्मिक परंपराओं को लेकर दिए जा रहे बयानों पर भी बन गया है। मंत्री का कहना है कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, जबकि पुरोहित महापंचायत ने धाम की धार्मिक मर्यादा और परंपराओं के अनुरूप आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया है।



