
भाजपा में टिकट के दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज, भजराम पंवार के नाम की भी हो रही चर्चा; मौजूदा विधायक विक्रम सिंह नेगी के सामने चुनौती बरकरार
टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। राजनीतिक दलों के साथ-साथ संभावित प्रत्याशियों ने भी अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। टिहरी गढ़वाल जिले की प्रतापनगर विधानसभा सीट पर इस बार स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। क्षेत्र में स्थानीय नेतृत्व, विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर चर्चाएं तेज हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी में संभावित प्रत्याशियों के नामों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जा रहे हैं।
करीब 80 हजार मतदाताओं वाली सीट पर स्थानीयता का सवाल
प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 80 हजार मतदाता होने का अनुमान है। उपलब्ध स्थानीय आकलन के अनुसार, इनमें करीब 70 प्रतिशत मतदाता प्रतापनगर ब्लॉक, 20 प्रतिशत जाखणीधार ब्लॉक और 10 प्रतिशत थौलधार ब्लॉक से संबंधित हैं। ऐसे में प्रतापनगर ब्लॉक की भूमिका चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वर्तमान में इस सीट से कांग्रेस के विक्रम सिंह नेगी विधायक हैं। वह दूसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। इससे पहले भाजपा के विजय सिंह पंवार भी दो बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2007 और 2017 में भाजपा, जबकि 2012 और 2022 में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी। पिछले चुनावों के नतीजे बताते हैं कि इस सीट पर दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला दिलचस्प रहा है।
स्थानीय प्रत्याशी की मांग बन सकती है बड़ा चुनावी मुद्दा
क्षेत्र में स्थानीय प्रत्याशी को लेकर चर्चा लगातार सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के एक वर्ग का मानना है कि क्षेत्र से जुड़ा जनप्रतिनिधि होने पर समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा और उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं। इसी वजह से आगामी चुनाव में प्रत्याशी की स्थानीय पहचान और क्षेत्र से उसका जुड़ाव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भाजपा ने वर्ष 2002 में कर्नल पी.डी. कुड़ियाल को अपना प्रत्याशी बनाया था। हालांकि, स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में उन्हें बाहरी प्रत्याशी के रूप में देखे जाने का उल्लेख मिलता रहा है। अब 2027 के चुनाव को लेकर यह सवाल फिर उठ रहा है कि भाजपा इस बार किसे मैदान में उतारती है और प्रत्याशी का क्षेत्र के साथ जुड़ाव कितना मजबूत होता है।
भाजपा में इन नामों की चर्चा
प्रतापनगर सीट पर भाजपा की ओर से संभावित दावेदारों के रूप में पूर्व विधायक विजय सिंह पंवार, पूर्व जिला अध्यक्ष अतर सिंह तोमर, पूर्व प्रमुख रोशन लाल सेमवाल, राजेश्वर पैन्यूली और भजराम पंवार के नाम राजनीतिक चर्चाओं में बताए जा रहे हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी किसी प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से पार्टी के सामने स्थानीय समीकरणों, संगठनात्मक अनुभव, जनाधार और चुनावी संभावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी। उम्र और संगठन में वर्तमान जिम्मेदारियों को लेकर पार्टी की संभावित रणनीति पर भी चर्चाएं हैं, लेकिन टिकट वितरण के संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व ही करेगा।
भजराम पंवार के नाम पर भी चर्चा
भाजपा के संभावित दावेदारों में भजराम पंवार का नाम भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वह उत्तराखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय हरबंस कपूर के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) भी रहे हैं। वर्तमान में वह भाजपा की प्रदेश टीम से जुड़े हैं।
बताया जाता है कि भजराम पंवार का गांव खोलगढ़, ओण पट्टी में स्थित है और उनका क्षेत्र के विभिन्न इलाकों से सामाजिक जुड़ाव है। उनके समर्थकों का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों का अनुभव और राजनीतिक संपर्क क्षेत्र की समस्याओं को शासन तक पहुंचाने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
क्षेत्र में हुई चर्चाओं के आधार पर कुछ स्थानीय लोगों ने उनके सरल स्वभाव, विनम्रता और जनसमस्याओं के समाधान की क्षमता को उनकी संभावित ताकत बताया है। हालांकि, इन प्रतिक्रियाओं को पूरे विधानसभा क्षेत्र की राय नहीं माना जा सकता। उनकी वास्तविक चुनावी स्वीकार्यता का आकलन व्यापक जनसंपर्क और अन्य दावेदारों के साथ तुलना के बाद ही किया जा सकेगा।
टिकट और जनसमर्थन पर टिकी निगाहें
प्रतापनगर विधानसभा सीट पर भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी स्थानीयता के मुद्दे को कितना महत्व देती है और किस संभावित प्रत्याशी पर भरोसा जताती है। दूसरी ओर, कांग्रेस के मौजूदा विधायक विक्रम सिंह नेगी के लिए भी अपने जनाधार को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल चुनाव में अभी समय है और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना बनी हुई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी एक दावेदार की उम्मीदवारी तय है या जीत निश्चित है। अंतिम तस्वीर भाजपा के टिकट की घोषणा, दोनों प्रमुख दलों की रणनीति, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख से ही स्पष्ट होगी।
प्रतापनगर में 2027 का चुनाव केवल पार्टी आधारित मुकाबला नहीं, बल्कि स्थानीय नेतृत्व, विकास और जनसमस्याओं के समाधान को लेकर जनता की अपेक्षाओं की परीक्षा भी बन सकता है।



