उत्तराखंड

प्रभारी ईओ नियुक्तियों पर घमासान: बेरोज़गार संघ का निदेशालय पर प्रदर्शन, मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप

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रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की मांग तेज, 15-15 लाख रुपये लेकर पोस्टिंग करने का लगाया आरोप; सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग

देहरादून। शहरी विकास विभाग में प्रभारी अधिशासी अधिकारियों (ईओ) की नियुक्तियों को लेकर विवाद अब गहराता जा रहा है। नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता पर पहले से उठ रहे सवालों के बीच शुक्रवार को उत्तराखंड बेरोज़गार संघ ने शहरी विकास निदेशालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने विभागीय मंत्री पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विवादित नियुक्ति आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की।

उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में युवा निदेशालय पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विभाग ने सेवा नियमों के विपरीत क्लर्क, कर निरीक्षक, सफाई निरीक्षक समेत अन्य कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी नियुक्त कर बेरोज़गार युवाओं के अधिकारों की अनदेखी की है।

‘हर पोस्टिंग के लिए 15 लाख रुपये लेने’ का आरोप

प्रदर्शन के दौरान राम कंडवाल ने आरोप लगाया कि प्रभारी ईओ की नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। उनका दावा है कि प्रत्येक पोस्टिंग के लिए 15-15 लाख रुपये लिए गए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में संगठन की ओर से कोई दस्तावेज या प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया। बेरोज़गार संघ ने सरकार से पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

नियमित भर्ती की मांग

संघ का कहना है कि प्रदेश में अधिशासी अधिकारियों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। इन पदों पर नियमित भर्ती कर योग्य युवाओं को अवसर देने के बजाय विभागीय कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाकर युवाओं के रोजगार के अवसर सीमित कर दिए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार जल्द निर्णय वापस नहीं लेती है तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।

मंत्री आवास घेराव की चेतावनी

बेरोज़गार संघ ने चेतावनी दी है कि अगला चरण मंत्री आवास घेराव का होगा। संगठन का कहना है कि प्रदेशभर से युवा देहरादून पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना देंगे और जब तक नियुक्ति आदेश वापस नहीं लिए जाते तथा नियमित भर्ती की घोषणा नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में शहरी विकास निदेशालय ने प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी नियुक्त करने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों के तहत क्लर्क, कर संग्रहकर्ता, सफाई निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों को नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी सौंपी गई। विभाग में अधिशासी अधिकारियों के कई पद रिक्त होने के कारण यह व्यवस्था की गई, लेकिन नियुक्तियों की वैधानिकता को लेकर सवाल उठने लगे।

सेवा नियमों पर उठे सवाल

विभिन्न कर्मचारी संगठनों और बेरोज़गार युवाओं का कहना है कि स्थानीय निकाय (केंद्रीयकृत) सेवा नियमावली-2016 के अनुसार अधिशासी अधिकारी के पद पर नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। उनका तर्क है कि सामान्य परिस्थितियों में क्लर्क, कर निरीक्षक या सफाई निरीक्षक सीधे इस पद के पात्र नहीं होते, ऐसे में उन्हें प्रभारी ईओ बनाना सेवा नियमों की भावना के विपरीत है।

हाईकोर्ट के निर्देशों का भी हवाला

इस विवाद के बीच नैनीताल हाईकोर्ट के पूर्व निर्देश भी चर्चा में हैं। वर्ष 2025 में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निकायों में अधिशासी अधिकारियों की कमी पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को उचित समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। बेरोज़गार संघ का आरोप है कि सरकार ने नियमित भर्ती करने के बजाय प्रभारी व्यवस्था लागू कर मामले का अस्थायी समाधान तलाशने की कोशिश की है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल शहरी विकास विभाग या विभागीय मंत्री राम सिंह कैड़ा की ओर से बेरोज़गार संघ द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि जल्द स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो यह विवाद आने वाले दिनों में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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