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हरिद्वार : नारायणी शिला मंदिर में पूजा के बाद राहुल गांधी पर बरसे हिमंत बिस्वा सरमा, दिल्ली आंदोलन को बताया तमाशा

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हरिद्वार। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध नारायणी शिला मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने परिवार और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर में पिछले 12 वर्षों से नियमित रूप से आने का जिक्र करते हुए कहा कि यहां पहुंचकर उन्हें असीम शांति की अनुभूति होती है। मंदिर में दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और दिल्ली में चल रहे राजनीतिक आंदोलन को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।

हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने के सवाल पर तंज कसते हुए कहा कि राष्ट्रपति देश के राष्ट्रपति हैं और उनसे कोई भी मिल सकता है। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में भी प्रतिदिन हजारों लोग जाते हैं। उन्होंने चंद्रयान और मंगलयान का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी पर व्यंग्य किया। उनके इस बयान को कांग्रेस नेता पर राजनीतिक कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है।

‘खुद को कॉकरोच कहने वालों पर बात करना बेकार’

मुख्यमंत्री सरमा ने अपने बयान में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, उनके बारे में बात करने का कोई फायदा नहीं है। उन्होंने इसके बजाय खुद को युवा शक्ति बताने वालों पर चर्चा करने की बात कही। हालांकि, उनके इस बयान में निशाने पर किस राजनीतिक समूह या व्यक्ति का संदर्भ था, इसे लेकर उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं कहा।

दिल्ली आंदोलन को बताया तमाशा

दिल्ली में चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे तमाशा करार दिया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन में शामिल लोगों की तुलना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में कहीं अधिक जनता है। उन्होंने कहा कि देश की 140 करोड़ आबादी में से बहुत कम लोग ही आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं।

सरमा ने विपक्ष पर सरकार को दबाव में लेने और ब्लैकमेल करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के आरोपों से डरने वाली नहीं है और ऐसे प्रयासों में विपक्ष को सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा की चुनावी सफलता का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री के इन बयानों से दिल्ली में जारी राजनीतिक विरोध और विपक्ष की रणनीति को लेकर भाजपा तथा कांग्रेस के बीच जुबानी टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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