उत्तराखंड

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के समारोह से स्थानीय नेतृत्व को रखा दूर?

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जिले के सर्वश्रेष्ठ अधिकारियों और स्थानीय नेताओं को नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में आयोजित दीक्षांत समारोह से किया दरकिनारे ?

जनपद उत्तरकाशी में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में चल रहे बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स 292 और एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स 182 रॉक क्राफ्ट, स्नो क्राफ्ट और आइस क्राफ्ट में कड़ी और गहरी ट्रेनिंग के बाद सफलतापूर्वक होने पर संस्थान ने उनके हौसले बुलंद करने के लिए खेल सचिव , , और द्वारा उपस्थित होकर स्नातक समारोह का भव्य आयोजन किया गया । वर्तमान में कार्यवाहक के रूप में संस्थान के प्रधानाचार्य ने जिला प्रशासन और मीडिया से दूरी बनाई गई इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा उत्तरकाशी जनपद का जहां मुख्य को ही प्राथमिकता नहीं दी जा रही जबकि उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को देश के सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारियों का दर्जा दिया गया है । जनपद के गलियारों में संस्थान शिष्टम पर सवालिया निशान खड़े हो रहे है । लंबे समय से संस्थान में आपसी मतभेद चल रहा है । कांग्रेस प्रवक्ता डॉ प्रदीप भट्ट पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड के खेल सचिव अमित सिन्हा जनपद के प्रतिष्ठित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में दीक्षांत समारोह में पहुंच रहे है । कई बार संपर्क साधने के बाद कोई जवाब नहीं मिला हमारे जनपद में देश का पहला नेहरू पर्वतारोहण संस्थान स्थापित है जिसकी साख भाजपा सरकार में गिरती जा रही है । स्थानीय मूल काश्तकार लंबे समय से अपनी सेवाएं देकर उनको बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है । संस्थान को स्थापित करने के लिए कोटियाल गांव के लोगों ने अपनी पैतृक संपत्ति संस्थान को दी है । जिसके बाद भी मूलभूत बिजली पानी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है । । संस्थान में लंबे समय से कार्यरत अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार के साथ साथ भर्ती घोटाला ,अपने चहेतों को मनमानी वेतन , बिना निविदा के निर्माण कार्य करवाया जा रहा है । संस्थान की गरिमा को बरकरार रखने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि जनपद के लोग का विश्वास संस्थान और सरकार के प्रति बना रहे ,संस्थान के अंदर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति यदि कठोर कार्यवाही नहीं होती है तो 2027 गंगोत्री विधान सभा चुनाव का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार का मुद्दा रहेगा ।जनपद का शिक्षित युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहा है, वहीं दूसरी ओर संस्थान में बिना किसी विज्ञप्ति, चयन प्रक्रिया और पारदर्शी भर्ती प्रणाली के नियुक्तियों के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि कुछ नियुक्तियां “पिछले दरवाजे” से की गईं,जिनकी आज तक कोई जांच ही नहीं की गई। जिनमें बाहरी और नेपाली मूल के लोगों को प्राथमिकता दी गई। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह उत्तरकाशी के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के अधिकारों और उनकी उम्मीदों पर सीधा प्रहार माना जाएगा।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जनपद का युवा वर्ग इन मुद्दों पर अपेक्षित रूप से मुखर दिखाई नहीं दे रहा। रोजगार और पारदर्शिता जैसे सवाल केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे समाज के भविष्य से जुड़े होते हैं। यदि स्थानीय युवा अपने अधिकारों और अवसरों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे, तो इसे उत्तरकाशी का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा।सरकार की नाकामियों को बताते हुए डॉ प्रदीप भट्ट ने उत्तराखंड सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि उत्तराखंड सरकार के पद आई ए एस अधिकारियों की कमी साफ झलक रही है इस लिए खेल सचिव का पद भार आई पी एस अधिकारियों के हाथ में सौंपा गया है ।जिस कारण नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की आज तक कोई सकारात्मक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई ।

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